Wednesday, May 24, 2017

Short Essay On Justice God Shani Dev - न्याय के रक्षक शनि देव की सम्पूर्ण जानकारी



शनि देव न्याय के देव हैं। उनका निवास शनि मण्डल पर है। शनि देव की पत्नी का नाम नीला देवी है। शनि देव के कुल सात वाहन होते हैं जिनमे हाथी, घोडा, कुत्ता, हिरण, गधा, गिद्ध और भेस का समावेश होत हैं। शनि देव सूर्य देव की दूसरी पत्नी छाया के पुत्र हैं।

शनि देव क्यूँ श्याम वर्ण हैं

शनि देव जब छाया के गर्भ में थे तब छाया शिव जी की भक्ति में लीन होने के कारण उन्हे खाने पीने का ध्यान-भान नहीं रहा था। इसी कारण शनि देव श्याम वर्ण उत्पन्न हुए थे।


शनि देव अपने पिता सूर्य से घृणा क्यूँ करते हैं

शनि देव अपने पिता से अत्यंत घृणा करते हैं इसी लिए उन्होने अपना निवास स्थान सूर्य से अत्यंत दूर रखा है। शनि देव श्याम वर्ण जन्मे होने के कारण उनके पिता सूर्य देव नें छाया पर चारित्रहिन होने का आरोप लगाया था।

शनि देव की उग्रता शांत करने के लिए दान पुण्य

पुष्य नक्षत्र, उत्तरा भाद्रपद और अनुराधा नक्षत्र के समय काले उड़द, तिल, काले फूल, लोहा, नीलम, कस्तुरी, चने, काले कपड़े, भैस, काले जूते, गोमेद, काली गाय, जांमुन के फल, कुलथी और सोना दान करने पर शनि देव की उग्रता शांत होती है।

शनि देव कृपा संबंधी कारोबार

तेल, लोहा, गैस, पेट्रोल, कोयला श्वेत वस्तु कारोबार, चमड़े से बनी वस्तुए, कार्बन से तैयार हुई चीज़ें, पत्थर और तिल का व्यापार करने वाले व्यक्ति पर शनि देव की कृपा रहती है।

शनि देव के रत्न और उपरत्न   

नीलिमा, नीलम, जामुनिया, नीलमणि, नीला कटेला, यह सारे शनि के रत्न और उपरत्न हैं।  

शनि देव की साड़ेसाती  

शनि की साड़े साती तीन कारणों से लग सकती है। लग्न से, चंद्र लग्न से, सूर्य लगना से। अंक शास्त्र में 8 का अंक शनि देव का अंक माना जाता है। किसी व्यक्ति की जन्म तिथि का मूल्य आठ है तो उसे सफलता अत्यंत परिश्रम के बाद ही मिलती है। (उदाहरण – तारीख 26= 2+6)।

शनि देव कब उग्र होते हैं  

माता को कष्ट देने वाले और काम, क्रोध, लोभ और मोह के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति शिग्र शनि देव की उग्रता का शिकार हो जाते हैं। 

शनि देव की वक्र दृष्टि से उत्पन्न होने वाले भयंकर रोग    

वात रोग, पेट के रोग, स्नायु रोग, गुदा में उत्पन्न होने वाले रोग, गठिया रोग, जांघों के रोग, टीबी, कैंसर, और भंगदर रोग शनि के प्रकोप से उत्पन्न होते हैं।



विशेष – शनि देव नें घोर तपस्या कर के भगवान शिव को प्रसन्न किया था और तब उन्होने शनि देव को वरदान दिया था की नव ग्रहों में तुम्हारा स्थान सभी ग्रहों से आगे होगा। और तुम्हारे प्रभाव से पापात्मा मनुष्य ही नहीं देवलोक के समस्त देव गण भी भयभीत रहेंगे।

  

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