Lomdi aur Bakri ki kahani- लोमड़ी और बकरी की कहानी (In Hindi)




एक ज़माने की बात हैएक जंगल हुआ करता थाजिसमे एक लोमड़ी रहेती थीऔर एक बकरी  रहेती थीबकरी स्वभाव से काफी रहेम दिल और भोली थी। बकरी अपना सारा  वक्त खाना खोजने मे बिता थीऔर लोमड़ी अपने चतुर चालक स्वभाव की मालिक थीवो भी पूरा दिन अपना पेट भरने के लिए यहा वह भटकती रहेती थी.जंगल छोटा होने के  कारण हर एक  जनवार एक दूजे को जानते थे. 

उसी जंगल मे एक शेर भी थाजो काफी आलसी थाउस बूढ़े शेर को शिकार खाना पसंद था पर करना नहींइस लिए उसकी सारी शेरनिया उसे दिन भर गालिया देती और काटती रहेती थी, ये शेर जंगल का राजा नाम का ही थाबाकी उसकी हालत खुजली वाले कुत्तो से भी बत्तर थी

एक दिनभी सुबह सुबह लोमड़ी शिकार के लिए निकलीलोमड़ी को खरगोश का शिकार मिल ही गया थापर तभी पैड के ऊपर बैठे बंदर ने चिल्ला चिल्ला कर लोमड़ी के शिकार खरगोश को भगा दियालोमड़ी बंदर को गलिया देते देते आगे बढ़ गयीआगे जाने पर लोमड़ी को एक और शिकार नज़र आता हैइस बार एक परिंदा पकड़ने के लिए लोमड़ी दौड़ लगती है,

पर बदकिस्मती से रास्ते पे पड़े गधी के गोबर पे पाव पड़ने से लोमड़ी फिसल जाती हैऔर खड्डे मे जा के गिर जाती हैखड्डे मे से बाहर आने के लिए लोमड़ी बहोत प्रयास करती हैपर कोय फाइदा नहीं होताखड्डा थोड़ा गहेरा होता हैवही दूसरी और शेरनी ओ ने अपने कामचोर जानम शेर को मुफ्त का शिकार खिला ने से मना कर दियाऔर बुरी तरह काट काट कर जूण्ड से भगा दिया

शेर भूखा प्यासा शिकार
 करने की कोशिस करता हैपर लंबे वक्त से बैठे बैठे खाने की वजह से शरीर भारी हो जाता हैतो एक भी शिकार हाथ नहीं आता हैरात हो जाती है लोमड़ी खड्डे मे पड़ी पड़ी सोच रही होती है के आज किस कंबक्त का मुह देख लिया थाजो पूरे दिन की पनवती लगी हैऔर अब जान यहा खड्डे मे फसी हैअंधेरे मे लोमड़ी को किसी के खुर की आवाज़ आती हैलोमड़ी सोचती है के अगर शेर या चीता हुआ तो आज राम नाम सत्य॥  पर खुशकीशमती से वो बकरी होती है,

बकरी लोमड़ी को खड्डे मे गिरा देखतुरंत मदद करने दौड़ती हैऔर ओंधे मुह वो भी खड्डे मे गिर जाती हैलोमड़ी कुछ बोले बिना बकरी को देखती रहेती हैफिर गुस्से मे लाल पीली हो कर बकरी पे चिल्लाती हैके तुजे दिमाग है के नहींजब पता है के मे यहा अंदर गिरि पड़ी हु तो आव या ताव देखे बिना मेरे सिर पे गिर ने की वजाय किसी से मदद लाती?



बकरी बोलती है के तुम्हें तकलीफ मे देख कर मे तो मदद करने आई थीमुजे नहीं पता थाके ऐसा होगालोमड़ी काफी देर सोचने के बाद बकरी से कहेती हैके एक काम करतू दो पेरो पर खड़ी हो जामे तुज पर चड़ कर बाहर निकाल आती हुफिर तेरे लिए मदद बुलाती हुक्यू की अगर यहा रात भर पड़े रहे तो रात के शिकारी हमे दोनों को ज़िंदा नहीं छोड़ेगेबकरी मान जाती है,


और लोमड़ी के कहे अनुसार खड़ी हो जाती हैलोमड़ी उस पर चड़ करखड्डे से बाहर निकाल आती हैलोमड़ी बाहर निकाल के बकरी को कहेती हैके तू एक बेवकूफ जानवर हैजो बाहर निकल ने का रास्ता जाने बिना पागलो की तरह खड्डे मे कूदीपर मे तेरी तरह दिमाग से पैदल  नहीं हु,

अगर मे इतनी रात मे तेरे लिए मदद मांगने जाती हु तू हो सकता हैरास्ते मे कोय बड़ा जानवर मुजे मार कर खा जाएइस लिए तू आज रात खड्डे मे गुज़ार और अगर रात मे कोय जानवर तुजे खा न जाए तो सुबह मे ज़रूर तेरे लिए मदद लाऊँगीक्यो की आखिर कार तेरी वजह से ही तो मेरी जान बची हैऔर मे खड्डे से बाहर भी तेरी वजह से ही हुइतना बोल कर लोमड़ी कूदती भागती अपने घर की और निकाल पड़ती है,



बकरी अंधेरी रात मे डरती कापती आसमान की और देख कर बोलती हैके है "भगवान तू है भी के नहीं ?" 
लोमड़ी सुबह से भूखी होती हैइस लिए रात को एक चूहा पकड़ती हैलोमड़ी ने चूहा मुह मे दबाया होता है तभी उसके सामने वो शेरनी ओ का कामचोर मोटा सुस्त बूढ़ा शेर आता है


लोमड़ी पूछने लगती हैके क्या बात है आज तो तुम इतनी रात मे घूम रहे होशेरनी ओ ने खाना नहीं दिया क्याशेर बोलता हैके मेरे तो दिन ही बुरे चल रहे हैसुबह से भूखा हुऔर शरीर सुस्त हो गया हैइस लिए शिकार भी नहीं कर पा रहा हुऔर शेरनी ओ ने धक्के मार मार के काट कूट के जूण्ड से भागा दिया है मुजे,

लोमड़ी सोचती है के
 शेर की दोस्ती हो गयी तो दूसरे शिकारी खुद के सामने आँख उठाने से पहेले भी दस बार सोचेगेलोमड़ी एक चाल चलती हैवो पकड़ा हुआ चूहा शेर की और फेकती हैऔर कहेती है के तुम भूखे हो तो ये लो खा लोमे एक और चूहा पकड़ लूँगीशेर खुस हो कर चूहा खा लेता हैऔर लोमड़ी दूसरा चूहा मिनटो मे पकड़ लाती हैफिर दोनों वही लोमड़ी के घर बैठ जाते है आराम करने लगते है,



बाते करते करते लोमड़ी की आँख लग जाती हैपर शेर जागता रहेता हैक्यूकी एक चूहे से शेर का पेट कहा भरने वाला था,  शेर की भूख लोमड़ी के खाना खिलाने वाले एहसान पर भारी पढ़ जाता हैऔर शेर न चाहते हुए भी सोती हुई लोमड़ी को मार कर खा जाता हैअब शेर की भूख तो शांत हो जाती हैपर उसका मन बहोत भारी हो जाता है,

शेर सोचता हैके ये मेने क्या कर डालाअपनी भूख मिटाने के लिए उस जीव को मार डाला जिसने मुजे खाना दिया थाखुद को कोसते और गालिया देते शेर आगे बढ़ जाता हैपूरी रात चोरो की तरह घूमते घूमते शेर उस जगह पहोच जाता हैजहा वो बदनसीब बकरी फसी पड़ी होती हैबकरी को देखते ही शेर की लार टपकती हैऔर वो एक छलांग मे बकरी के पास खड्डे मे पहोच जाता है,

बकरी और शेर एक दूजे की आँख मे देखते हैबकरी को शेर मे मौत दिखाई देती हैशेर को बकरी मे खाना दिखाये देता हैतभी अचानक शेर को लोमड़ी याद आजती हैजिस लोमड़ी ने उसके सामने चूहा फेका था और उसकी भूख मिटाई थीऔर शेर ने उस एहसान के बदले सोती हुवी लोमड़ी को मार कर खाया थाये याद आते ही शेर का दिल भर आता हैऔर वो सोचता है के जो पाप किया था उसका अब प्रायश्चित करता हुखड्डे मे फसी इस बकरी की जान नहीं लेता हु.

इतना बोल कर शेर बकरी को अपने ऊपर चड़ कर खड्डे से बाहर निकल ने मे मदद कर देता हैऔर खुद भी छलांग मार कर खड्डे से बाहर निकाल आता हैऔर बकरी को सही सलामत अपने रास्ते जाने देता हैऐसा करने से शेर का जी हल्का हो जाता हैऔर बकरी फिर एक बार आसमान की और देख कर बोलती हैके "हे ऊपरवाले आज तूने साबित कर दिया के तू है"

अंत मे बकरी अपने बच्चो के पास घर लौट जाती हैशेर की दबंग शेरनिया भी अपने आलसीबूढ़ेकामचोरमोटेशेर को घर वापिस ले जाती हैऔर लोमड़ी की आत्मा ऊपर आकाश मे बैठी बैठ कसम खा लेती हैके 

"अगर अगली बार लोमड़ी का जनम मिला तो कभी किसी भोले जानवर के साथ चालाकी नहीं करूंगीक्यू की ये समज आ गया के जो भोले होते है उस के साथ भगवान होता है"


सार= 

जिंदगी मे आप को अलग अलग स्वभाव के इन्सान मिलेंगे चतुरभावुकभोलेसमजदारनासमजगुस्सैलशांतकुटिलइन सब मे जो लोग दिल से फैसले लेते हैवो कहानी 

की बकरी की तरह भोले होते हैऐसे लोगो के साथ कभी चालाकी नहीं करनी चाइयेऔर ऐसे लोगो का गलत फाइदा भी नहीं उठाना चाइयेक्यू की जिसका कोय नहीं होता उसका 

भगवान होता हैभोले का भगवान होता है, in short  "दिल से फैसले लेने वाले लोगो के साथ हिसाब लगाने मे हमेशा घाटा ही हाथ आता हैआज़मा लीजियेगा" 




Lomdi aur Bakri ki kahani- लोमड़ी और बकरी की कहानी (In Hindi) Lomdi aur Bakri ki kahani- लोमड़ी और बकरी की कहानी (In Hindi) Reviewed by Paresh Barai on 2:51:00 PM Rating: 5

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