गधे और बैल की कहानी - Story of bull and donkey (in-Hindi)


एक गाँव मे एक मनमोजी गधा रहेता था, गधा खाली नाम का ही गधा था बाकी दिमाग उसका लोमड़ी के जैसा तेज़ चलता था, गधे को खाना पीना और मौज करना पसंद था, गधे को काम करने मे कोय रुचि नही  थी, गधे का मालिक उसे रोज भरपेट खाना देता था, फिर भी गधा काम करने मे आलस करता और काफी धुलाई होने के बाद ही थोड़ा बहोत काम करता था,


गधा भूख लगने  पर अपने मालिक के पास पहोच कर मीठी मीठी आवाज़े निकाल कर पुंछ हिलाने लगता, और गधे का मालिक गुस्सा थूक कर  गधे को खाना खिला देता, और उसकी काम चोरी माफ कर देता , इस तरह गधे के दिन आराम से कट रहे थे,  



उसी गाव मे एक महेनती बैल रहेता था, और वो खेतो मे दिन रात महेनत करता था, और उसका मालिक अगर खाना न भी दे तो भी वो काम करता ही रहेता था, गधा इस बैल को देख कर हस्ता रहेता और सोचता के ये देखो इतना बड़ा बैल है पर इस मे दिमाग बिल कुल नहीं है, 



एक दिन नदी किनारे गधा बैल से कहेता है, भाई बुरा मत मान ना पर तू एक दम बुद्धू है, तुजे इतना समज नहीं आता के तेरा मालिक किसान तुजे भरपेट खाना भी नहीं खिला पाता, फिर भी उसके लिये, दिन रात महेनत करे जा रहा है, मुजे देख मे काम भी अपनी मर्ज़ी हो तो करता हु और खाना भी भरपेट खाता हु, 



बैल मुसकुराता है और जवाब देता है, के तुम्हारे सवाल का जवाब मुज पर उधार रहा, मे तुम्हें वक्त आने पे जवाब दूंगा, गधा बैल पर हस कर नदी से चला जाता है, और मैदान मे लोटने लगता है। 


दिन बीतने लगते है, समय आगे बढ्ने लगता है, एक दिन गाव मे भारी बरसात हो जाती है, और गाव मे बाढ़ आती है, बदकिस्मती गधा और बैल दोनों ही बाढ़ मे बहे कर एक खुले कुए मे जा गिरते है, दोनों ही बाहर निकलने के लिए जटपटाते है, और चीख पुकार करते है, 


थोड़ी ही देर मे भीड़ जमा हो जाती है, और लोग जानवर निकालने वाले को बुला ले आते है, जानवर निकालने वाला कुए मे उतरता है, और देखता है के बैल और गधे दोनों की हालत खराब है और शायद दोनों ही लंबे समय तक चलफिर न पाये और काम भी नहीं कर पायेंगे, गधे और बैल के मालिको को बुला कर जानवर निकालने वाला दोनों जानवर की हालत मालिको को बताता है, 


गधे का मालिक बोलता है के वैसे ही मुजे इस कामचोर का खाना पीना भारी पड़ता है, और ऊपर से ये कुछ काम भी ठीकसे नहीं करता, इस लिए इसे कुए से तो मे निकलवा दूंगा पर इसका इलाज और आगे का खाना पीना मे अब नहीं दूंगा, इस लिए इस गधे की सेवा करने से अच्छा है के मे इसे किसी कसाई को बेच दु, और इस तरह वो कसाई से गधे का सोदा कर देता है, 


बैल का मालिक अपने बैल की हालत देख रो पड़ता है, और कहेता है के ये बैल मेरे लिए जानवर नहीं मेरा परिवार है, क्यू की इसने हर कदम दिन रात मेरे खेत मे जी तोड़ महेनत की है, इस लिये  इसे निकाल दो कुए से बाहर और मे इसकी सेवा भी करूंगा और अगर जिंदगी भर ये ठीक न हो पाया तो भी मे इसे खाना पीना देता रहूँगा और एक परिवार के सदस्य की तरह  इसे प्यार और इज्ज़त भी दूंगा,

कुए मे पड़े पड़े बैल गधे की और देखता है, और कहेता है, के जो सवाल तूने नदी पे मुजसे पूछा था उसका जवाब ये है,  


अंत मे बैल अपने मालिक को समजा बूज़ा कर गधे को अपने साथ लेजाने को मना लेता है, ताकि कसाई के हाथ उसकी जान न जाये, इस तरह बैल का मालिक गधे को कसाय से खरीद  लेता है,  और कुछ महीनो मे ठीक होने पर बैल और गधा जम कर किसान के खेत मे काम करते है, और सुखी जीवन बिताते है, 


सार- 
जीवन मे आराम सभी को पसंद है, पर जो जीव अपनी ज़िम्मेदारी और कर्तव्य  से आँख चुरा कर, या चालाकी से भागता रहेता  है, वो कभी न कभी अपने आप को कहानी के गधे जैसी मुसीबत मे पा सकता है, इस लिये  ज़िम्मेदारी उठाये और कर्तव्य का पालन करे.



गधे और बैल की कहानी - Story of bull and donkey (in-Hindi) गधे और बैल की कहानी - Story of bull and donkey  (in-Hindi)   Reviewed by Paresh Barai on 6:38:00 AM Rating: 5

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