गैंडी सविता भाभी का आतंक - Short Fiction Comedy Story – Gendi Savita Bhabhi


सविता भाभी का जन्म होते ही, उसके बाबूजी के सिर के बाल झड़ने लगे। माँ काली पड़ गयी और पड़ौसी भीख-मंगे हो गए। सविता जिस स्कूल में पढ़ने गयी उस स्कूल का उत्थापन भी जल्द हो गया। पूरे गाँव में सविता भाभी का नाम सविता पनवती पड़ गया। और यहाँ हमारे बड़े भाई पांडु-रंगा 36 साल के हो चले थे, और छुट्टे सांढ की तरह शादी के लिए उतावले हो रहे थे।


हमारे बाबूजी सविता के गाँव जा पहुंचे और हमारे बड़े भाई पांडु-रंगा के लिए गाँव की फेमस कलमुहि सविता का रिश्ता नक्की कर आए। अब हमें लगा की घर में भाभी आ रही है तो सब का खयाल रखेगी, लाड़ करेगी।    


लेकिन शादी के दूसरे ही दिन सविता भाभी नें हमें बुला कर हमारे हाथ में 10 रुपये रख दिये,,, हम समझ नहीं पाये की भाभी हमें छुट्टे पैसे क्यूँ गिफ्ट कर रही है,,, पर फिर उन्होने मुह फाड़ कर जब बोला की एक 135 नंबर बड़ी सुपारी वाली खैनी मावा ले आ,,, तब समझ आया की भाभी के नाम पर खैनी खाऊ लफंगी, मवाली  भैसिया घर घुस आई है।




हमारे बाबूजी नें बड़े भाई पांडु रंगा और खैनी खाऊ सविता भाभी को हनीमून पर उदयपुर भेजा, वहाँ हमारी गेंडी भाभी नें होटल से तोलिया और साबुन चोरी कर लिया और होटल वालों नें पुलिस केस कर दिया। अब बाबूजी जमानत देने तो गए पर चोरटी भाभी की करतूत के कारण बाबूजी नें पांडु रंगा को गोबर वाली चप्पल से पीटा।




घर आते ही सविता भाभी नें ज़िद पकड़ ली की मुझे घर के पास वाली नदी में तैरने जाना है। बाबूजी नें साफ मना कर दिया। लेकिन पांडु रंगा नहीं चाहता था की उसकी माल-गाड़ी, छाप खैनी खाउ, चोरटी बीवी माइके चली जाए।


बाबूजी शहर गए थे तब,,, एक दिन दो पहर में पांडु रंगा सविता भाभी को नदी ले ही गया। डायनासोर की सूझी हुई अंडी सविता भाभी “धबांग” कर के नदी में कूदी,,, तभी हदबड़ाहट में चार पाँच मगर-मच्छ पानी के अंदर से सतह पर आ गए।




अभी हमारे पांडु रंगा भैया नदी किनारे बैठ कर खैनी खाऊ भाभी की तंबाकू पीट ही रहे थे की,,, नदी से भयानक गर्जना की आवाज़ आई,,,


यह चुड़ैल छाप त्राड हमारी भैस-भाभी नें ही लगाई थी। पांडु रंगा अपनी मोटीसी बीवी को बचाने फौरन पानी में कूद गए,,, सविता भाभी अचानक खुद तैर कर, नदी के किनारे आ मरी,,, अब हमारे कूड़ दिमाग पांडु रंगा पानी में गोथे खा रहे थे,,, जिनहे कूड़ा उठाने वाले भिखारियों की टोली नें नदी में जा कर,,, सिर के बाल पकड़ कर नदी से बाहर खींचा।


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रंगा – राणा की जोड़ी (सविता – पांडु ) अब नदी किनारे बाहर आ चुके थे तो,,, गभराए हुए मगर-मच्छ फिर से नदी के पानी में घुस गए। यह दोनों नदी पर कांड कर के घर लौट रहे थे तभी अचानक बाबूजी शहर से वापिस लौट आए। और फिर से उन्होने हमारी जंडु भाभी की फरमाइस पूरी कर रहे पांडु रंगा की रोड पर ही पिटाई कर दी।



रात को घर लौट कर सविता भाभी नें प्लास्टिक जैसी मज़बूत रोटी और कंकड़-पत्थर जैसी सबझी हमें ठुसने के लिए दे दी। बाबूजी उपवास का बहाना कर के सटक गए, पांडु रंगा दस्त का बहाना कर के निकल लिए और अब भाभी मेरी और टक-टकी लगाए देख रही थी। अब ऐसा खाना चबाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता,,, पर मुझे समझ नहीं आ रहा था की इतना टिकाऊ खाना गले से निगलूँ तो कैसे निगलूँ।


तभी अचानक मेरा बचपन का दोस्त विमल लट्ठा स्वामी मेरी गली में आ पहुंचा और उसनें वहीं खड़े खड़े बांग मारी की,,, उसे पागल कुत्ते नें काट लिया है,,, मै हड़प से खड़ा हुआ और भाभी को बोला की विमले को दवाखाने ले जाना होगा,,, में खाना बाद में खाऊँगा। लाख लाख शुक्र है उस महान पागल कुत्ते का जिसनें समय पर विमल को काट कर भाभी के भयानक खाने से मुझे बचा लिया।
मै रात को बारह बझे घर लौट आया और चुपके से सारा खाना गली के कुत्ते को डाल दिया। कुछ ही देर में हमारी गली के कुत्ते की रोने की आवाज़ आने लगी,,, शायद भाभी के बनाए खाने से उसके दाँत टूटे होंगे या उसका पेट खराब हुआ होगा।


करीब रात को तीन बझे हमारे घर पर चोर घुस आए,,, उन दोनों चोरों की बद-किस्मती देखो,,, वह सब से पहले सविता भाभी के रूम में घुसे। अभी चोर भाभी के कबाट से चिल्लर उठा ही रहे थे की,,, रात की तीन बझे बासी खाना ठूस रही मेरी चांडाल भाभी दौड़ कर बैड-रूम में आ गयी।
अब दोनों मासूम चोर मेरी भयानक भाभी की गिरफ्त में थे। दाल सबझी वाले मुह से मेरी भाभी नें उन दोनों चोरों को बे तहाशा काटा,,, और फिर उन दोनों को मार मार कर ज़मीन पर गिरा दिया,,, और खुद उनके ऊपर बैठ कर हिडिंबा की तरह चिल्लाने लगी।


कुछ ही देर में अघोरी पांडु रंगा की नींद टूटी, और बाबूजी भी दौड़ कर भाभी के कमरे में आ गए,,, मै अपनें रूम में पड़े पड़े सोच रहा था की,,, दस हथनीओं की ताकत रखनें वाली मेरी सविता भाभी पर दुनियाँ की कोई आफ़त आ ही नहीं सकती,,, पर फिर भी मै भी वहाँ नज़ारा देखने पहुँच ही गया।


बड़ी मुश्किल से उन दों पिचके हुए चोरों को सविता भाभी के चंगुल से हमने दूर किया। भयानक भांड भाभी नें जिस तरह उन चोरों को काटा था,,, उसे देख कर विमले लट्ठे को काटने वाला पागल कुत्ता मुझे कई गुना मासूम लगा।


दोनों चोर बोलनें लगे की यह क्या बला पाल रखी है घर में,,,? हमें पुलिस में देदो,,, मिलेट्रि में देदो,,, सज़ा ए काला पानी देदो पर इस लेडी भस्मासुर हथनी से बचा लो,,,। जैसे तैसे कर के बाबूजी नें दोनों चोरों को थोड़ा बहुत डांट कर मरहमपट्टी के पैसे दे कर रवाना किया।



अगले दिन सविता भाभी को स्कूटर सिखनें का मन हो गया,,, मैंने फौरन पूरे इलाके में घोषणा करा दी की,,, अपनें बच्चों-कच्चों को संभाल कर अपनें घर के अंदर ठूस लेना,,, हमारी गोबर-गेंडी भाभी को स्कूटर सीखने का भूखार चड़ा है। - “Just For laugh” 
गैंडी सविता भाभी का आतंक - Short Fiction Comedy Story – Gendi Savita Bhabhi गैंडी सविता भाभी का आतंक - Short Fiction Comedy Story – Gendi Savita Bhabhi  Reviewed by Paresh Barai on 12:28:00 PM Rating: 5

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