IBS अनियमित मल त्याग के कारण और उसके घरेलू उपाय

यह हमारी बड़ी आंत से जुड़ी एक जटिल समस्या है। इस रोग को अंग्रेजी में IBS यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम कहा जाता है। इस समस्या में रोगी को बार बार मल त्याग करनें जाना पड़ता है। या फिर एक या दो दिन तक दस्त की समस्या रहती है। मल त्याग अनियमितता के साथ साथ पेट दर्द और थकान की समस्या भी रहती है, इस रोग में रोगी को, कई बार खाने के तुरंत बाद सौच जाना पड़ता है। किसी भी तरह का ड्रिंक यानी की चाय या कॉफी पीने पर तुरंत सौच जाना पड़ता है। एक बार सौच जाने के बाद थोड़ी ही देर में दूसरी बार पेट साफ करने के लिए सौच जाना पड़ता है। अगर किसी व्यक्ति का पेट साफ नहीं रहता है। तो उसे पूरे दिन बैचेनी और थकान रहती है। इस रोग के कारण इन्सान थोड़ा बहुत मानसिक तनाव भी महेसूस करता है। डॉक्टर के पास जाने पर यह बीमारी कुछ समय तक ठीक तो हो जाती है, लेकिन किसी कारण यह समस्या फिर से उत्पन्न भी हो सकती है। आइये इस जटिल बीमारी के बारे में ठीक से समझे और इसके उपाय जानें।

IBS इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के प्रकार

यह रोग आम तौर पर तीन प्रकार का होता है। (1) IBS D = बार बार दस्त लगना। (2) IBS C = एक ही समय पर बार बार सौच जाना पड़ता है। और कब्ज़ रहता है। (3) IBS A = इस प्रकार में रोगी को कभी कभी कब्ज़ रहता है तो कभी कभी दस्त हो जाता है।   

पेट की इस समस्या IBS के लक्षण क्या है

पेट में तेज़ दर्द या एठन, पेट फूल जाना, आफ़रा आना, एक समय पर ही अधिक बार सौच जाना, मल के साथ चिकनाहट वाला पदार्थ बाहर आना, कब्ज़ या दस्त रहना।

IBS

आखिर यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम रोग क्यूँ होता है?

यह रोग पेट की गड़बड़ी से बढ़ता है। खानपान सही ना रखने पर भी यह तकलीफ हो जाती है। खाने में दूध उत्पाद, चॉकलेट, डैरी प्रॉडक्ट, गेंहू, गोबी, मदिरा और बाहर का चपटता खाना अधिक खाने वाले लोगों को यह problem हो सकती है। कुछ लोग शरीर से तो तंदूरस्त होते हैं। और खानपान भी सही होता है, लेकिन किसी बात की मानसिक चिंता या तनाव होता है। ऐसे लोगों को भी यह रोग चपेट में ले सकता है। अगर किसी व्यक्ति के माता पिता या अन्य पूर्वज को यह रोग रहा हों तो भी यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

IBS रोग से मुक्ति के लिए आयुर्वेदिक जड़ीबुट्टीयां

आंवला, त्रिफला, दाड़िम, बिल्व, शंख भष्म, हरीतकी, चित्रक, पंचकोल।

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IBS इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का रोग दूर करने के उपचार

सही खानपान – व्यक्ति को इस समस्या से बचना है तो अधिक चिकने पदार्थ नहीं खाने चाहिए। छोटे छोटे टुकड़े चबा चबा कर खाने चाहिए। भोजन भूक लगने पर ही करना चाहिए। खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर नहीं लेटना चाहिए। भोजन के साथ छाछ और दहीं लेना चाहिए। इस से पाचनतंत्र ठीक रहता है। इस रोग में जीरे और पुदीने वाली छाछ पीना बहुत लाभदायक होगा। रात को गरम दूध के साथ ईसबगोल की भुस लेने पर IBS रोग में राहत होगी। दस्त लगने पर बिल्व खाने से IBS रोग का ज़ोर घटेगा। और अगर कब्ज़ हुआ है तो रोगी को त्रिफला का सेवन करना चाहिए।

व्यायाम – व्यायाम से शरीर स्वस्थ रहेगा। तनाव घटेगा। रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी। आंतों में मल जमा नहीं होगा। पेट साफ आएगा। और शरीर में चुस्ती फुर्ती बढ़ेगी।

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