एक समझदार गिद्ध Giddh की प्रेरणादायी कहानी – Motivational Story

घने जंगल में गिद्धों का एक जुण्ड रहता था। वह सारे एक जुण्ड  में मिल कर ही शिकार करते थे। कुछ दिनों बाद वहाँ जंगल के आस-पास भोजन की काफी कमी महसूस होने लगी तो, सब नें मिल कर दूर देश उड़ कर दूसरा इलाका ढूँढने का फ़ैसला किया। कई दिनों तक अलग-अलग विस्तार की खोज के बाद उस जुण्ड को एक ऐसा समप्न्न विस्तार मिला जहां शिकार करने के लिए बहुत उपयुक्त जगह थी। वहाँ बड़ी आसानी से शिकार मिल जाता था। तालाभ में भरपूर मछ्लीयां, पैड पर कई सारे छोटे बड़े पक्षी, ज़मीन पर मांस भक्षीयों का जुट्ठान और अन्य सारे भोजन के स्रोत मिलने पर गिद्ध (Giddh ) का जुण्ड तो जैसे स्वर्ग की अनुभूति कर रहा था।

धीरे धीरे समय बीतने लगा।

एक दिन सभी गिद्ध (Giddh) मिल कर भोजन कर रहे थे तो उन में से एक गिद्ध दौड़ कर कुछ खाने भागा और गिर पड़ा। उसके गिरते ही सब अन्य गिद्ध उस पर अट्ट-हास्य करने लगे।

अब जो गिद्ध गिर गया था उसे थोड़ी देर तो बुरा लगा पर वह चुप रहा और बिना कुछ कहे सब के साथ शिकार खाने लगा। फिर थोड़ी देर बाद वह बोला की… हमें इस जगह से चले जाना चाहिए…. 

उस गिद्ध (Giddh) की यह बात सुन कर बाकी सारे गिद्ध उस पर फिर से हसने लगे… और उसे मूर्ख बता कर उसे बुरा भला कहने लगे….

अपने साथी और सगे संबंधी गिद्धों की बात उसे बहुत बुरी लगी… पर फिर भी वह गिद्ध (Giddh) अपनी बात पर अड़ा रहा और उस जगह से जाने के लिए सब को मनाता रहा।

Giddh

कुछ दिन बाद थक हार कर उस गिद्ध नें अपने मन की बात सुनी… और वह खुद “अकेला” वहाँ से उड़ कर अपने पुराने निवास की और चला गया। वहाँ खाने पीने के स्रोत कम थे, पर खूब महेनत करने पर उसे शिकार मिल जाता था, अब उसका पूरा दिन शिकार ढूँढने में और आराम करने में बित जाता था।

कुछ दिन बाद….  

अकेले रहने पर उसे अपने परिवार और अन्य साथी गिद्धों की याद आने लगी… तो वह उड़ कर फिर वहाँ गया जहां पर सब को छोड़ कर वह आया था। वहाँ जा कर देखा तो,,,,

उस जगह एक भयानक सन्नाटा छाया हुआ था। आस पास गिद्धों के पिंजर पड़े थे। कुछ गिद्ध अधमरे और लहू लुहान पड़े थे।

यह सब देख कर वह गिद्ध (Giddh) अपने साथियों से पूछने लगा की…  आप सब की यह हालत कैसे हुई?

तब वहाँ पड़े एक घायल गिद्ध नें उत्तर दिया की यहाँ पर हिंसक जंगली पशु रोज़ हमारा शिकार करनें आते हैं और जब वह शिकार खा कर थक जाये तो हम से खेलते हैं… और हमें अधमरा छोड़ कर चले जाते हैं… कई गिद्ध मारे जा चुके हैं और जो ज़िंदा हैं वह भी जल्द मारे जाएगे…

वहाँ पर आए हुए गिद्ध ने कहा की…  आप सब अपना बचाव क्यूँ नहीं कर रहेहमला होने पर उड़ जाना चाहिए नाउड़ कर,, भाग कर वहीं हमारे पुराने इलाके में आ जाते तुम सब…???

तब ज़ख्मी गिद्ध हस कर बोला की,,,,

हमनें तुम्हारी बात मान ली होती तो आज हमारी यह नहीं होती… आसान शिकारमिलने से हम इतने मोटे और आलसी हो गए की अब ना तो हम फुर्तीले रहे और ना ही चपल… उड़ना तो दूर अब हमसे चला भी नहीं जाता… येही कारण है हम ज़मीन पर ज़्यादा रहने लगे… और इसी कारण जंगली पशुओं का आसान शिकार बनते जा रहे हैं।

गिद्ध (Giddh) अपने साथियों की मदद करना चाहता है पर वह कुछ नहीं कर पाता है। उन गिद्धों नें अपनी बरबादी अपने ही हाथों लिखी थी। वह गिद्ध थोड़ी देर विलाप कर के वापिस लौट जाने के लिये मजबूर होता है। और खुद के फैसले पर खुद पर गर्व महेसूस करता है।

सार

अधिक आरामदेह जीवन व्यक्ति को कुंठित और निर्बल बना देता है। खुद को समय के साथ आगे बढ़ाना और स्वास्थ्य का ख्याल करना अत्यंत ज़रूरी है। कभी कभी कुछ फैसले खुद ही लेने पड़ते हैं जसी की कहानी के गिद्ध (Giddh) नें लिया और बरबादी से बच गया। बिना महेनत आसानी से मिलने वाली हर चीज़ इंसान को आलसी, मूर्ख तथा दुर्बल, बना सकती है। इस लिये प्रवृतिशील रहें। काम काजआराममनोरंजन और कर्तव्य का सही संतुलन बनाये और सुखी रहें – धन्यवाद।

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